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शुक्रवार, 17 जुलाई 2020

जगत और जीवन, jagat aur jivan

जगत और जीवन,


झांक रहे है इधर-उधर सब, अपने अन्दर झांके कौन। 
ढु़ंढ रहे हैं दुनियां मे कमियां, अपने मन मे ताके कौन।
दुनियां सुधरे सब चिल्लाते, खुद को आज सुधारे कौन।
पर उपदेश कुशल बहुतेरे, खुद पर आज विचारे कौन।
हम सुधरे तो जग सुधरेगा, यह सीधी बात स्वीकारे कौन।

मानव के बिना जगत की कोई उपयोगिता नही और जगत के बिना मानव  का कोई अर्थ नही। जगत और जीवन एक दुसरे के पुरक है।

हमारा शरीर पंचतत्वों (पृथ्वी, जल,अग्नि, आकाश, और वायु) से निर्मित है। जीवन भी इसी से चलता है और जगत भी इसी से चलता है। अतः जगत और जीवन एक दुसरे के पुरक है। हमे परमात्मा के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करना चाहिए, जिन्होने हमे एक स्वस्थ शरीर देकर दुर्लभ प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण इस जगत मे हमे भेजा। प्रभु के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का सबसे सरल उपाय है कि हम पर्यावरण को मानव जीवन के लिए उपयोगी बनाए रखें।
जगत और जीवन एक दुसरे के पुरक है
जगत और जीवन

प्रकृति मे ही जीवन है,


प्रकृति परमात्मा की बनाई हुई है और मानव भी प्रभु की अनुपम कृति है। प्रकृति और मानव की सेवा को ही यदि हम पुजा  मानकर आचरण मे लाएं तो हम अधिकांश लोग लोगों के प्रिय बनने के साथ ही प्रभु के निकट भी होंगे, क्योंकि परमात्मा को भी  अपने द्वारा रचित प्रकृति और अपनी अनुपम कृति मानव सर्वप्रिय है। यह सिद्धान्त की बात है कि जो हमारी सबसे प्रिय वस्तु से प्रेम करता है वह हमारा सबसे प्रिय होता है। जगत और मानव इन दोनो से पोषित है। मानव जीवन का अस्तित्व भी इन्हीं पर निर्भर है।

मानव के बिना जगत की कोई उपयोगिता नही,


मानव के बिना जगत की कोई उपयोगिता नही और जगत के बिना मानव  का कोई अर्थ नही। अन्योन्याश्रित संबंध है जगत और जीवन का। अखिल ब्रह्माण्ड के स्वामी, जगन्नियंता प्रभु के निकट हम तभी होंगे जब इन दोनो की सेवा और रक्षा करेंगे। केवल अपने लिए ही जीने मे कोई विशेष बात नही, महत्वपूर्ण यह है कि हमारे शरीर और संसाधनों मे कितनो की सहायता मिली और लाभ हुआ। यह बात यदि हम ईमानदारी से अमल मे लाएं तो निश्चित रुप से हमारा समाज और राष्ट्र सुखी एवं समृद्धशाली होगा।

सम्पूर्ण समाज को यदि हम  अपना परिवार मानेंगे और आत्मीयता का व्यवहार करेंगे तो अपनत्व का विस्तार होगा। लोगों के दुःख-दर्द बांटने मे हमारी भागीदारी होगी। परस्पर प्रेम और सहयोग की भावना बढ़ेगी। सर्वत्र सुख का वातावरण होगा।

समय -सत्ता-संपत्ति और शरीर चाहे साथ दे या न दे लेकिन स्वभाव, समझदारी, सतसंग और सच्चे संबंध हमेशा साथ देते है। 




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