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शनिवार, 9 नवंबर 2019

जीवन मे फुल ही चुने, काँटे नही। jivan me phool hi chune kante nahi

जीवन मे फुल ही चुने, काँटे नही

सारा जहाँ उसी का है,जो मुस्कुराना जानता है।
रोशनी उसी की है,जो शमा जलाना जानता है।
जैसा बोओगे वैसा ही काटोगे,जीवन मे फुल ही चुने, काँटे नही,jivan me phool hi chune kante nahi,jivan ki sachai
jivan me phool hi chune kante nahi

जीवन मे अशुभ भाव कांटों की तरह है, इसिलिए न उनका संग्रह करना चाहिए और न ही आदान - प्रदान।

जीवन एक पथ है और प्रतेक मनुष्य यहाँ यात्री है। जन्म से लेकर मृत्यु तक हर मानव इस जीवन-पथ पर चलता है। वह इस पथ पर चलता रहे और यही उसके मनुष्यत्व की सार्थकता है।

संसार मे तीन तरह के लोग जीवन जीते है। पहले प्रकार का जीवन ऐसा है, जहां पशु मे और मानव जीवन मे कोई फर्क नही है। दुसरे प्रकार का जीवन वह है जीसमे मनुष्य, मनुष्य की तरह बनने के लिए इच्छुक होता है। जहाँ मनुष्य अपने बाहरी विकास के साथ-साथ अपने भीतर की उंचाई को भी प्राप्त करने की तमन्ना रखता है। तीसरे प्रकार के जीवन मे मनुष्य इश्वरत्व की उंचाई तक पहुंचना चाहता है। जीवन नदी की वह धारा है, जो सांसारिक किनारों को छुकर बहा करती है। कुछ नदी किनारों को दिया करती है, तो कुछ न कुछ वह किनारों से लिया भी करती है। इस तरह सारा जीवन लेन देन भरी एक यात्रा है और इसका सर्वोत्तम सुत्र है। न्यूनतम लेना, अधिकतम देना और श्रेष्ठतम जीना। प्रत्यक्ष या परोक्ष रुप से उठते - बैठते  चलते- फिरते जाने -अनजाने जीससे भी हम मिलते है उनसे जीवन उर्जा का आदान-प्रदान होता है। ऐसे मे कुछ भेंट ली जाती है और कुछ भेंट दी जाती है। मनोविज्ञान कहता है कि जो भीतर है, वह बाहर झलकता है। जो भीतर है, हम वही बांटना चाहते है। इसिलिए श्रेष्टतम जीवन कैसे जिया जाए, इस पर विचार करना होगा। केवल स्थूल अर्थों मे जीना तो उथलापन है। इसके गहरे अर्थ को समझने का प्रयास होना चाहिए। जब हम अपनी गहराई मे जाएंगे तो हमें अपने भीतर राग-द्वेष, झुठ ,पाखंड ,लोभ ,कपट और अहंकार जैसे अनेक विकार दिखेंगे, लेकिन साथ ही सत्य,करुणा और पवित्रता के भाव भी दबे हुए ही सही, किन्तु वे भी अवश्य दिखाई देंगे। संभव है, इतना अंत: दर्शन भी व्यक्ति का जीवन बदल दे।
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जीवन पथ का सर्वश्रेष्ट पाथेय 


लेकिन जीवन मे कहा जाता है कि जीवन पथ का सर्वश्रेष्ठ पाथेय है, उनसे दुर रहना जिनसे अशुभ मिलता हो और उनके सदा करीब रहना जिनसे कुछ श्रेष्ठ मिलता हो। लेकिन आदतन जीवन मार्ग मे हमे जो भी कुछ देता है, हम बटोर लेते है। कभी आवश्यकता से तो कभी औपचारिकता से, कभी शर्म से तो कभी मजबूरी से। इस प्रकार अपने जीवन मे भी कचरा इकट्ठा कर लेते है। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति रास्ते मे कुछ अपवाहें सुनाना शुरु करे तो हम उसे अत्यंत ध्यान से सुनने लगते है, बिना यह सोचे समझे कि इनको मन के भीतर ले जाने से क्या परिणाम होगा। व्यर्थ की बातों मे सिर खपाना हमारी दिनचर्या का हिस्सा बनकर रह गया है। हैरानी की बात है कि हमारे आंगन मे कोई कचरा डाल जाए तो हम नाराज होकर उससे झगरने चले जाते है। लेकिन जब कोई हमारे मन या मष्तिष्क मे झुठी और निरर्थक बातों का कचरा डालता है तो न हम नाराज होते हैं और न ही उसे लेने से इन्कार करते है, बल्कि ध्यान लगाकर उसे रुचिपुर्वक सुनते है।

जीवन मे अशुभ भाव काँटों की तरह है 

एक माली खाली टोकरी लेकर बगीचे मे फूल तोरने के लिए गया| वहाँ कुछ देर तक चमेली, केबरा,मोगरा,कनेर,गेंदा आदि के फूल तोड़ -तोड़कर अपनी टोकरी मे डालता रहा| सहसा हँसते हुए कुछ गुलाब के फूल दिखाई पड़े| माली उनके पास पहुंचा और प्रश्न किया 'क्या आप अपने हंसने का कारण बताएंगे ?

गुलाब ने कहा आवश्य , परंतु इससे पहले आप हमारे प्रश्न का उत्तर दीजिए की प्रतिदिन आप इस फुलवारी मे से फूल ही क्यों चुनते है ? कांटे क्यों नहीं चुनते ? माली ने जबाव दिया , जिनके लिए ये फूल चुने जाते हैं ,वे मनुष्य केवल फूलों से ही प्यार करते हैं, काँटों से नही| यह सुनते ही गुलाब ने व्यंग भरे स्वर मे कहा , यदि ऐसी बात है तो मनुष्य दूसरे के जीवन मे कांटे बोना और देखना क्यों पसंद करता है ? माली इस प्रश्न से ठगा रह गया | जीवन मे अशुभ भाव उन्हीं काँटों की तरह है , न उनका संग्रह करना चाहिए और न ही आदान -प्रदान |

आपके के ज़िंदिगी मे आज जो कुछ भी है उसकी वजह है वो सभी विकल्प जो आपने चुने थे| अगर आपको अलग परिणाम चाहिए तो फिर अलग विकल्प चुनना शुरू कर दीजिए |

https://www.jivankisachai.com/






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