जीवन की सच्चाई,सीखने का नाम है जिन्दंगी,हर पल सीखते रहिए और सफल बनिए,स्वस्थ जीवन ही सबसे बड़ा धन है,यही है जीवन की सच्चाई,Fact of Life

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रविवार, 26 अप्रैल 2026

श्रीरामचरितमानस, उत्तरकांड

श्रीरामचरितमानस, उत्तरकांड 

ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गौरीशंकराय नमः ॐ श्री जानकीवल्लभो नमः ॐ श्री हनुमते नमः 
प्रभु श्रीरामजी लंका से लौटते समय प्रयागराज में मां गंगा के तट पर पूजा आराधना हेतु रुके। तब भाई भरत जी की व्यग्रता को समझते हुए प्रभु श्रीरामजी ने श्री हनुमान जी को शीघ्र अयोध्या जाने की आज्ञा दी। तब श्री हनुमान जी ने शीघ्र ही अयोध्या पहुंच गए और ब्राह्मण का भेष बनाकर श्री भरत जी के पास गए और संकेत में प्रभु को अयोध्या आने का समाचार सुनाए। श्री भरतजी ने बड़ा ही व्यग्रता के साथ ब्राह्मण रूपी हनुमान जी से सब कुछ सच सच बताने को कहा तब श्री हनुमान जी ने अपना मूल रूप में आकर श्री भरत जी को प्रभु श्रीरामजी भैया लक्ष्मण जी एवं माता सीताजी को अयोध्या में आने का विस्तृत समाचार सुनाए। श्री भरत जी को यह समाचार सुनते ही ऐसा सुख का अनुभव हुआ जो माता सरस्वती और शेष जी भी वर्णन नहीं कर सकते। 
श्री हनुमान जी यह समाचार देने के बाद वापस प्रभु श्री रामजी के पास गंगा के तट पर गए और पूरा समाचार बताएं। तब प्रभु रामजी अपने सभी परिकरों के साथ पुष्पक विमान से अयोध्या को रवाना हुए। इधर श्री भरत जी ने यह समाचार पहले गुरु श्री वशिष्ठजी को प्रभु की आने का समाचार सुनाए फिर सभी माताएं को ये समाचार मिला। अद्भुत आनंद और उल्लास अयोध्या में छा गया यह समाचार सारे अयोध्या वासी को जब मिला तो समस्त अयोध्या के नर नारी प्रभु श्रीरामजी के स्वागत में पलके बिछाए अपने अपने अटारी से देखने लगे कि कब प्रभु श्रीराम जी और माता सीताजी और भैया लक्ष्मण जी अयोध्या में पधारेंगे। 
समस्त अयोध्या में हर्षौल्लास का वातावरण हो गया पूरी प्रकृति अपना सर्वश्रेष्ठ सुख की छाया देने लगे सरयू का जल अति निर्मल सुहावनी हो गई सभी जीव जंतु खुशी से झूमने लगे। कुछ ही पल में प्रभु श्रीरामजी अपने परिकरों के साथ अपने जन्म भूमि अयोध्या में प्रवेश किए ऐसा आनंद और खुशी की बाढ़ आ गई जो वर्णन नहीं किया जा सकता। तब सभी अयोध्यावासी ने प्रभु श्रीरामजी एवं माता सीता जी और भैया लक्ष्मण जी को अति प्रेम भाव विभोर के साथ स्वागत किया। तब प्रभु रामजी में पहले भारत भैया को गले लगाए। यह मिलन को देख सभी देवी देवताओं ने फूल बरसाए और अपना सौभाग्य माना। तत्पश्चात प्रभु गुरु श्री वशिष्ठ जी को प्रणाम किए फिर तीनों माताएं को प्रणाम किए और आशीर्वाद लिए।
समस्त अयोध्या में सुख समृद्धि का बयार बहने लगा समस्त जीव जंतु खुशी से नाचने लगे। पेड़ पौधे नदिया वायु आकाश धरती सब अपने आप को धन्य महसूस करने लगे अद्भुत आनंद और उल्लास का वातावरण हो गया। सभी माताएं ने ब्राह्मणों को बहुत सारे दान दिए और ब्राह्मणों ने भी उसे औरों को दान दिए सभी एक दूसरे को दान दे रहे मानो कुबेर जी ने खजाना खोल दिया हो क्यों ना हो रिद्धि सिद्धि के दाता स्वयं श्रीराम जी और सीताजी के रूप बिराजमान है। 

तत्पश्चात प्रभु श्री रामजी का राज्याभिषेक हुआ सभी देवी देवताओं ने फूल बरसाए मंगल गीत चारों तरफ गूंजने लगा चारों दिशाएं मंगल गीत गाने लगी सभी जीव जंतु एवं समस्त प्रकृति झूमने लगी। रामराज्य आ गया सभी लोग सुख और समृद्धि के साथ रहने लगे। राम राज्य में कोई भी दुखी नहीं हुआ कोई शिशु की मृत्यु नहीं हुआ, कोई स्त्री विधवा नहीं हुई, किसी को कोई शारीरिक कष्ट नहीं हुआ, किसी को भी किसी प्रकार का कोई कष्ट नहीं हुआ सब मंगल ही मंगल हुआ। यही है राम राज्य। भगवान ने ११००० वर्षों तक राज्य किए। और इस पृथ्वी को अत्याचारों से राक्षसों से मुक्त किए।

यह श्रीरामचरितमानस भगवान शंकरजी के मन में बसा था अवसर पाकर भगवान शंकरजी ने माता पार्वती जी को सुनाए। यह पतित पावन गंगा है श्रीरामचरितमानस।
इस गंगा के भी चार घाट है। १. कैलाश पर्वत, बाबा भोलेनाथ ने माता पार्वती जी को सुनाए, २.तीर्थराज प्रयाग, याज्ञवल्क्य जी ने भारद्वाजमुनि जी को सुनाए, ३.नीलगिरी पर्वत, कागभुसुंडि जी ने पक्षीराज गरुड़ जी को सुनाए, ४. काशी का अस्सीघाट, गोस्वामी तुलसीदास जी ने संत समाज एवं अपने मन को सुनाए।
जय श्री सीताराम 
गोस्वामी श्री तुसीदास महाराज की जय।
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